20 मार्च को सुबह 5:30 तिहार जेल में चारों गुनहगार को फांसी. जानिए फांसी देने के पहले जल्लाद कैदी के कान में क्या कहता है?

वह समय आ गया है जिस समय का पूरे भारतवर्ष और निर्भया के माता-पिता को इंतजार था. आज सुबह 5:30 चारों दोषी को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा. और यह पहली बार होगा कि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर जिसमें 16000 कैदी है उस तिहार जेल में 4 लोगों को एक साथ फांसी दी जाएगी. हालांकि फांसी देने के पहले दोषियों के वकील ने पूरी तरीके से कोशिश की कि केस को आगे बढ़ा दिया जाए जिससे उन्हें कुछ समय मिल सके उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की.

यह घटना 16 दिसंबर 2012 की रात को हुई थी, इस घटना में कई प्रकार के उलटफेर हुए परंतु यह घटना एक अंजाम पर पहुंच सका है तो इसमें सबसे बड़ा भूमिका निर्भया की मां ने निभाई है उन्होंने हर कोर्ट के चक्कर लगाकर अपनी बेटी को न्याय दिलाया है वह चाहे सुप्रीम कोर्ट हो या हाईकोर्ट, उन्होंने हार नहीं मानी और आज 20 मार्च 2020 को चार अपराधी को अपने घोर अपराध की सजा हो गई.हालांकि, इसके तुरंत बाद, निर्भया दोषियों ने अपने कानूनी विकल्पों को समाप्त करना शुरू कर दिया और इसलिए निष्पादन में दो महीने की देरी हुई।

फांसी देने से पहले कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है?

आपने कई जगह सुना होगा और फिल्मों में देखा होगा फांसी देते हुए, परंतु अगर आप गौर करेंगे तो जल्लाद अपराधी को फांसी देने के पहले उनके कान में कुछ शब्द बोलते हैं, यह शब्द बहुत आदमियों को पता नहीं है कि जल्लाद उन लोगों को फांसी देने के पहले क्या बोलता है. दरअसल फांसी की सजा इतना खतरनाक होता है कि लोग इसके बारे में कुछ चर्चा करना ठीक नहीं समझते हैं और इससे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में बात नहीं करते हैं.जैसे कि फांसी का फंदा, फांसी देने का समय, फांसी की प्रकिया आदि पहले से ही तय होते हैं।

जल्लाद एक सरकारी मुलाजिम होता है जो दिल पर पत्थर रखकर यह काम करता है।
यही वजह है कि फांसी देने के पहले जल्लाद अपराधी के कान में यह कहता है “भाई मुझे माफ कर देना, मैं तो एक सरकारी कर्मचारी हूं। कानून के हाथों मजबूर हूं। इसके बाद अगर मुजरिम हिंदू है तो वह उसे राम राम बोलता है। वही अगर मुस्लिम है तो वह उसे आखिरी दफा सलाम करता है। साथ ही जल्लाद कहता है कि मैं तो सरकार के हुक्म का गुलाम हूं, इसलिए जानबूझकर तुम्हें मौत नहीं दे रहा हूं।”

बस व इन शब्दों को कहकर ही वह फांसी का फंदा खींच देता है और थोड़ी ही देर में उन सबको मेडिकल ले जाया जाता है और उसका मुआयना होता है. जल्लाद एक बहादुर और निरर व्यक्ति होते हैं उनका काम बहुत ही हिम्मत का होता है यही वजह है कि सरकार को इस पद पर बहुत ही कम आदमी मिल पाते हैं जो इस काम को करना चाहते हैं

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